इन कोशिशों से आगे और आगे बढ़ रही है हिन्दी

सुषमा त्रिपाठी

हिन्दी का मतलब सिर्फ हिन्दी साहित्य ही नहीं बल्कि हिन्दी साहित्य के साथ और आगे देखना है। जीवन के हर क्षेत्र में पैठ बनाना है। यह तो मानी हुई बात है कि हिन्दी मीडिया का वर्चस्व है मगर हिन्दी को आज युवा वर्ग भी बहुत आगे ले जा रहा है। हालांकि तकनीक, विज्ञान और कम्प्यूटर के क्षेत्र में और भी काम करने की जरूरत है मगर ऐसा नहीं है कि काम नहीं हो रहा है। नये प्रयोग और नयी तकनीक के साथ नयी सोच हिन्दी को आम जनता से जोड़ रही है। इन प्रयासों का स्वागत करते हुए हम आपको ऐसी ही कुछ संस्थाओं और वेबसाइट्स व यू ट्यूब चैनलों के बारे मे बता रहे हैं जिनको आपको देखना चाहिए ताकि जब आपके सामने कोई हिन्दी के नाम पर मातम मनाए तो आप उनको खरी – खरी सुना सकें। हिन्दी दिवस काी शुभकामनाओं के साथ पेश है जानकारी –


हिन्दी कविता – अमरिका के मियामी में बस चुके एक सफल फिल्म निर्माता और व्यवसायी, मनीष गुप्ता ने जब मैथिलीशरण गुप्त, रामधारी सिंह दिनकर, महादेवी वर्मा, अमृता प्रीतम और कवियों की कविताओं के सम्बन्ध में लोगों की अरुचि देखी तो उन्होनें हिन्दी कविता उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री के बेहतरीन कलाकारों के द्वारा जाने-माने समकालीन और पुराने कवियों की कविताएँ प्रस्तुत कराने का निश्चय किया। इस का नतीजा बेहतरीन रहा! मनोज वाजपेयी द्वारा पढ़ी गयी ‘दिनकर’ की ‘रश्मिरथी‘ को 1,90,000 दर्शक मिले और लेखक–अभिनेता पीयूष मिश्रा की स्वरचित कविता ‘प्रेमिकाओं के नाम‘ को 86,000 से ज्यादा दर्शक मिले। कविता को विशेष तौर पर युवाओं केबीच में प्रयास आरम्भ कर दिया और आज कई सेलिब्रिटी हिन्दी कविता पढ़ते नजर आते हैं। हिन्दी कविता की सृजनात्मकता को बरकरार रखते हुए हिन्दी कविता ने इसे बॉलीवुड से खूबसूरती से जोड़ा। चैनल देखें तो पुष्पा भारती की आवाज में कनुप्रिया जरूर सुनें।

https://www.youtube.com/channel/UCBHtPALSbWn0WaRusU9_gFg


गाँव कनेक्शन – गाँव को समझने, गाँव की समस्याओं को समझने में इसकी बड़ी भूमिका है। ग्रामीण भारत को समझने के लिए गाँव कनेक्शन देखना बहुत फायदेमंद है। गाँव कनेक्शन की। यह 5 साल पुराना है। कुछ ख़बरों को अगर देश के सबसे बड़े पत्रकारिता पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। गांव के लोगों, किसानों के अख़बार गांव कनेक्शऩ की शुरुआत 2 दिसंबर 2012 को उत्तर प्रदेश के एक गांव में हुई थी। इन पांच वर्षों में गाँव कनेक्शन ने नए मुकाम हासिल किए, पहले साप्ताहिक, फिर दैनिक अखबार के बाद अब डिजिटल माध्यम से ग्रामीण भारत की अलग झलक को देश-दुनिया तक पहुंचा रहा है। इन पांच वर्षों में गाँव कनेक्शन को पत्रकारिता के क्षेत्र के कई उत्कृष्ट सम्मानों से सम्मानित किया गया। साथ ही गाँव कनेक्शन के काम को देश-विदेश की कई मीडिया संस्थानों ने इसके काम को सराहा।

https://www.gaonconnection.com/


लल्लन टॉप – आजतक की वेबसाइट पर समसामायिक विषयों और खोजपरक सामग्री से लेकर खबरों तक का विश्लेषणपरक आज की पीढ़ी को ध्यान में रखकर यहाँ पेश किया जाता है। कहने की जरूरत नहीं कि यह बेहद लोकप्रिय हो चुका है। आप यू ट्यूब पर इसके वीडियो देख सकते हैं। कई मुद्दों पर आपकी असहमति हो सकती है मगर निश्चित रूप से यह प्रयास हिन्दी के प्रसार को बढ़ा रहा है।

https://www.thelallantop.com/

डेवलपमेंट फाइल्स – प्रख्यात लेखक अमरेन्द्र किशोर का यह चैनल सीधे हमारे जमीनी मुद्दों की पड़ताल करता है जिसमें खेती से लेकर जंगल और आदिवासियों जैसे अनगिनत मुद्दे शामिल हैं। अमरेन्द्र किशोर इसके प्रबन्ध सम्पादक हैं। हर वीडियो गहन रिसर्च और कड़ी मेहनत को साफ दर्शाता है। ऐसे कई और चैनलों की जरूरत है। भारत की जमीनी हकीकत समझनी है तो आपको यह चैनल जरूर देखना चाहिेए।

https://www.youtube.com/channel/UC_e7qUVXna8HhCHLjdMLAtw


द बेटर इंडिया – अगर आपको भारत का स्वच्छ, सकारात्मक चेहरा देखना है तो आप इस वेबसाइट पर जरूर जायें। यह भारत के हर कोने से चुनकर सकारात्मक खबरें लाता है। यह हिन्दी और अँग्रेजी, दोनों में उपलब्ध है।

https://hindi.thebetterindia.com/

योर स्टोरी – हिन्दी रोजगार और स्टार्ट अप की भाषा है। ऐसी कई कहानियाँ और युवा उद्यमियों से लेकर दिग्गजों की कहानियाँ आपको इस वेबसाइट पर मिलती हैं और साथ ही मिलते ही सुझाव। यह वेबसाइट भी हिन्दी और अँग्रेजी, दोनों में उपलब्ध है।

https://hindi.yourstory.com


नीलांबर कोलकाता – नीलांबर की स्थापना का मूल उद्देश्य है –साहित्य और संस्कृति के साथ आम जन से सरोकार स्थापित करना। इसकी स्थापना 26 दिसंबर 1999 को ‘और अंत में प्रार्थना ’ के मंचन के साथ ही हुआ था। 1999 से 2005 तक संस्था ने कई प्रकार के साहित्यिक –सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया। नीलाम्बर द्वारा आयोजित कविता जंक्शन, एक साँझ कविता की, जैसे आयोजन काफी सफल रहे हैं। यह टीम युवाओं की टीम है और इसने कविता को तकनीक से जोड़कर उसका फलक और भी विस्तृत बनाया है। नीलाम्बर का कविता कोलाज और कई नाटकों का मंचन काफी सराहा गया है। देश भर के साहित्यकारों को साथ लाने का काम करते हुए नीलाम्बर ने लिटरेरिया की शुरुआत की जो कि इतिहास ही कहा जा सकता है क्योंकि देश के सारे साहित्यकारों को वापस कोलकाता की तरफ मोड़ने का काम नीलाम्बर ने किया है जिससे शहर लोकप्रिय हुआ है। नरेश सक्सेना, राजेश जोशी, अनामिका जैसे कई दिग्गज कवि और नयी पौध को शहर में लाने का श्रेय इसी संस्था को जाता है। बगैर किसी खास आर्थिक सहयोग के इतना बड़ा काम करना यह एक उम्मीद तो जगाता ही है। यह संस्था फेसबुक पर हिन्दी को आम आदमी तक ले जाने का काम बखूबी कर रही है। यू ट्यूब लिंक यह रहा –

https://www.youtube.com/channel/UCAMk14W3SIV7o2tZz83uLoA?app=desktop


बोल पोयट्री – बोल पोएट्री तीन दोस्त धीरज पांडेय, विहान गोयल ( ऐक्टर ) और विरेंद्र राय चलाते हैं। यह कविता को वीडियो प्रारूप में पेश करता है और सीधे युवाओं की समस्याओं पर बात करता है। लड़के खासकर अपनी आवाज इसकी कविताओं में पाते हैं। वैसे सामाजिक समस्याओं पर भी यह चैनल मुखर है। मजे की बात है कि इसकी पहली कविता ‘क्या तुम समझती हो’ पहले कई बड़े प्रडक्शन हाउसों और फ़ेस्बुक/यूटूब के बड़े चैनलों ने यह कह कर खारिज कर दी थी कि कविता में दम नहीं है। हर जगह रिजेक्ट होने के बावजूद भी तीनों निराश नहीं हुए और एक सीमित बजट में कुछ दोस्तों की मदद से वीडियो शूट किया और उसके बाद जो हुआ, वह तो इतिहास ही है।

https://www.facebook.com/poetrybol/


सुनो कहानी – फेसबुक, सीरिखा माध्यम बहुत बड़ा वर्चुअल अड्डा है…! जहां हम सब भाती भाती के अनुभव से दो चार होते है. ये माध्यम किसी भी तरह की सूचनाओं को बड़ा फलक तक ले जाना का एक महत्वपूर्ण टूल भी है. इस माध्यम ने बहुत से लोगों से जुड़ने का मौका दिया. जो इस माध्यम का खूबसूरत पहलू है…इला से नबम्बर २०१६ के आस-पास जुड़ना हुआ. फिर हम गाहे-बगाहे कहानियों पर खूब बातें करने लगे…जहां मुझे ज्ञात हुआ कि इला ने समकालीन कहानियाँ कम पढ़ी है…लेकिन समकालीन को जानने व समझने की रूचि उनमेँ लगीं.और मैंने उन्हें कुछ कहानियाँ पढ़ने के लिए भेजी. ये सिलसिला कुछ महीनों तक चलता रहा…इसे सिलसिले के आधार पर हमें समकालीन हिन्दी कहानियों को केंद्र में रखकर कुछ करने का विचार आया…एक बहुत बड़ा वर्ग हैं जो आज नेट इस्तेमाल करता है…और उस वर्ग को साहित्य से जोड़ने के लिए आज साउंड क्लाउड और यू ट्यूब सबसे उपयोगी टूल हैं! .तो हमनें सोचा कि कहानियों को रिकॉर्ड कर यू ट्यूब पर डाला जाए…इस तरह के उपक्रम की शुरुआत हम लोगों ने ‘कथा कथन’ नामक यू ट्यूब चैनल पर कुछ कहानियां डाल कर की. जो भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने का एक मंच हैं. लेकिन, कुछ समय बाद हमें लगा कि एक चैनल क्यूँ न ऐसा शुरू किया जाए जो हिंदी कहानियों पर ही फ़ोकस हो…! उसी आईडिया का नाम -“सुनो कहानी” है… जहाँ समकालीन लेखकों के साथ स्थापित लेखकों की भी कहानियां आप सुन सकेंगे… हर शुक्रवार आप एक नई कहानी से रूबरू होंगे. इस मुहीम में उन लेखकों की भी कहानियां समय-समय पर सुनाई जाएगी जो शायद कहीं छपे नहीं हो! हर उपक्रम को पूरा करने के लिए एक टीम की भी जरूरत रहती हैं. तो ‘सुनो कहानी’ की छोटी सी टीम इस प्रकार हैं-इला जोशी, अनिमेष जोशी, मयंक सक्सेना, अनुज श्रीवास्तव, आलोक कुमार।

https://www.youtube.com/channel/UCW_xd1Eyin-kqVeAbLBe2kA


वैचारिकी – चारिकी भारतीय विद्यामंदिर की ओर से प्रकाशित की जा रही शोध पत्रिका है । धर्म , दर्शन ,विज्ञान , साहित्‍य, लोकसाहित्‍य , इतिहास एवं पुरातत्‍व जैसे महत्‍वपूर्ण विषयों पर शोध परक आलेख प्रकाशित करने वाली यह द्वैमासिक पत्रिका पिछले 31 सालों से निरंतर प्रकाशित हो रही है । सिम्‍पलेक्‍स इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर्स लिमिटेड के सौजन्‍य से प्रकाशित हाने वाली इस पत्रिका के पाठक देश के लगभग सभी भागों में तो है ही विदेशों में भी है। पत्रिका की कुल 4500 प्रतिया पूरे देश में वितरित होती है । भारतीय संस्‍कृति के प्रचार प्रसार के लिए प्रतिबद्ध पत्रिका में विभिन्‍न क्षेत्रों के विद्वानों के साथ ही पाठकों के भी शोध परक आलेख प्रकाशित होते हैं। सत्‍यनारायण पारीक, डा गणपति चंद्र गुप्‍त, डा मनोहर शर्मा इसके सम्‍पादक रह चुके हैं । वर्तमान में डा बाबूलाल शर्मा वैचारिकी के सम्‍पादक हैं।यह कोलकाता से ही निकलने वाली हिन्दी की शोध पत्रिका है जो इतिहास और परम्परा के साथ साहित्य को साथ लेकर चलती हैं। इसमें आपको अतीत झाँकता नजर आयेगा। हिन्दी के साथ अगर राजस्थानी को समझना हो तो वैचारिकी जरूर पढ़ें।
विज्ञान वार्ता – विज्ञान वार्ता एक ब्लॉग है जो विज्ञान के एक सहायक शिक्षक द्वारा चलायी जा रही है। आज लगभग हर लेखक व साहित्यकार की रचनायें और हिन्दी शिक्षण भी आपको यू ट्यूब पर मिल सकती हैं।

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One thought on “इन कोशिशों से आगे और आगे बढ़ रही है हिन्दी

  • September 15, 2018 at 3:19 pm
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    Yeh prayas chalte rahen. Hindi ke poojak anek hain. Ve usko badhate rahenge…

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