जापान की मेयर ने की सूमो रेसलिंग में महिलाओं को बराबरी की माँग

टोक्यो : महिलाओं के साथ यूं तो हर देश में भेदभाव किया जाता है। फिर चाहे बात हो पढ़ाई की, नौकरी की या किसी खेल क्षेत्र की। कई नौकरियों में तो यह तक कह दिया जाता कि उसके लिए केवल पुरुष ही आवेदन कर सकते हैं। ऐसी ही एक परंपरा जापान की भी है। यहां 400 साल पहले शुरू हुआ खेल सूमो रेसलिंग जापान का सबसे पुराना और पवित्र खेल माना जाता है। इसमें शुरू से ही ये परंपरा रही है कि रिंग (दोह्यो) में महिलाएं प्रवेश नहीं कर सकतीं। लेकिन इस परंपरा के खिलाफ अब जापान के तकाराजुका शहर की मेयर तमोको नाकागावा ने आवाज उठाई है मगर मेयर होने के बावजूद उनको अन्दर नहीं जाने दिया गया और उन्होंने रिंग के बाहर भाषण देकर अपनी बात रखी।
उनके मुताबिक वह इस पुरुष प्रधान परंपरा को नहीं मानती हैं, महिलाओं को आखिर क्यों इस रिंग से दूर रखा जाता है। उनहोंने कहा कि महिलाओं को बराबरी का दर्जा दिलाने के लिए वह हर 6 महीने में याचिका दायर करती रहेंगी। तमोको ने आगे कहा कि वह चाहती हैं कि इस मामले पर स्थिति साफ हो जानी चाहिए। सूमो एसोसिएशन को अब महिलाओं की आवाज सुननी होगी और इस मामले में हर स्तर पर बहस होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई भी ऐसी वजह नहीं है कि महिलाओं को रिंग में अभ्यास करने से रोका जाए।

तमोको के ऐसा कहने के बाद एसोसिएशन ने भी बयान दिया है। एसोसिएशन के मुताबिक यह परंपरा शुरू से रही है कि महिलाओं को रिंग में प्रवेश करने से रोका जाए। इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि महिलाओं के साथ भेदभाव किया जाता है। इसके बाद एसोसिएशन ने मेयर को भरोसा दिलाते हुए कहा कि वह इस विषय पर कार्यकारी अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे और इस समस्या का हल निकालेंगे। एसोसिएशन के जवाब को सुनने के बाद तमोको ने कहा कि अगर महिलाओं को बराबरी का दर्जा नहीं दिया गया तो वह आंदोलन शुरू कर देंगी।
गौरतलब है कि करीब 15 दिनों पहले सूमो टूर्नामेंट के दौरान एक घटना घटी थी जिसके बाद तमोको ने महिलाओं के लिए आवाज उठाई। हुआ ये कि 6 अप्रैल को क्योटो में एक टूर्नामेंट चल रहा था। तब मायजुरु के मेयर रिंग में खड़े होकर भाषण देते वक्त बेहोश हो गए। तो उनकी मदद के लिए कुछ महिलाएं रिंग के अंदर पहुंच गईं। जिसके बाद एसोसिएशन ने माइक पर अनाउंसमेंट कर महलाओं को रिंग से बाहर जाने को कहा और इसे अपवित्र मानते हुए रिंग में बहुत सारे नमक का छिड़काव किया।
बता दें यह खेल जापान में 16वीं सदी में शुरू हुआ था। जिसका पहला मुकाबला 1684 में हुआ। तभी से वहां यह परंपरा चली आ रही है कि महिलाएं रिंग में प्रवेश नहीं कर सकतीं। इस रिंग का व्यास 4.55 मीटर का होता है और यह 6.7 मीटर के आयताकार प्लैटफॉर्म के अंदर ही रहता है।

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