जीएसटी आंकड़ों को साझा करने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश की जरूरत: मुख्य आर्थिक सलाहकार

नयी दिल्ली : मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन ने सरकारी विभागों के साथ माल एवं सेवा कर( जीएसटी) के आंकड़ों को साझा करने के लिए स्पष्ट मसविदा तैयार किये जाने की वकालत की है। उन्होंने कहा कि यह राज्य की क्षमता को प्रतिबिंबित करता है और इससे सकल घरेलू उत्पाद: जीडीपी: के बेहतर तरीके से अनुमान लगाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि ई- वे बिल को लागू करने और इन्वॉयस के मिलाने से राजस्व संग्रह बढ़ाने में मदद मिलेगी।

जीएसटी नेटवर्क के स्थापना दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुब्रमण्यन ने कहा कि जीएसटी आंकड़ों से अर्थव्यवस्था, औपचारिक क्षेत्र रोजगार और निर्यात के बारे में बेहतर तरीके से जानकारी मिल सकेगी। इससे तत्काल आधार पर सांख्यिकी संकेतकों को भी सुधारा जा सकेगा।

जीएसटी नेटवर्क जीएसटी के आंकड़े जुटा रहा है। मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि इससे आंकड़ों के बारे में अनुमान में वास्तव में बड़ा बदलाव होगा। मासिक आधार पर हम अर्थव्यवस्था के बारे में उच्च आवृत्ति वाले आंकड़े जुटा सकेंगे जो पहले नहीं किया जा सकता था।

उन्होंने कहा, ‘‘ इसका मतलब है कि जीएसटीएन और सरकार के अन्य विभागों को आंकड़ों को साझा करने के बारे में स्पष्ट नियम बनाने होंगे। किन परिस्थितियों में इन्हें साझा किया जा रहा है क्योंकि यह राज्य की क्षमता के बारे में भी होंगेजीएसटीएन नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था का आईटी आधार है। अभी तक1.05 करोड़ इकाइयों ने इस पोर्टल पर पंजीकरण कराया है।

उन्होंने बताया कि ज्यादातर देश आर्थिक वृद्धि के आंकड़ों की गणना मांग पक्ष के आधार पर करते हैं, जबकि भारत में उपभोग के आधार पर अनुमान लगाया जाता है। सुब्रमण्यन ने कहा कि जीएसटी आंकड़ों से जीडीपी की तिमाही वृद्धि दर के आंकड़े मांग के आधार पर निकाले जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि ईमानदार अधिकारी जांच एजेंसियों के भय से कड़े फैसले लेने से हिचकिचाते हैं। ऐसे में जीएसटीएन सार्वजनिक निजी भागीदारी की व्यवस्था है जिसमें कड़े फैसले लिए जा सकते हैं।

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