धार्मिक कट्टरता और अज्ञानता के विरोधी थे राहुल सांकृत्यायन

कोलकाता : विद्यासागर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से राहुल सांकृत्यायन की 125 वीं जयंती के अवसर पर `राहुल सांकृत्यायन की प्रासंगिकता’ विषय पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया । कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. दामोदर मिश्र ने कहा कि राहुल सांकृत्यायन बहुआयामी प्रतिभा के धनी लेखक थे । उन्होंने दर्शन, इतिहास, मार्क्सवाद, साम्यवाद, घुमक्कड़शास्त्र, भाषा आदि पर साधिकार लिखा । इस अवसर पर विभाग की शोध छात्रा मधु सिंह ने कहा कि राहुल सांकृत्यायन की दृष्टि व्यापक और मानवीय है । उन्होंने विवेकपरक ढंग से लेखन किया । रुखसार परवीन ने कहा कि अपनी प्रतिभा के कारण राहुल आजमगढ़ से विदेश तक का सफर तय करते हैं । सुनील कुमार ने कहा कि राहुल का विपुल साहित्य उनकी बहुज्ञता के कारण लिखा गया । रेशमी वर्मा ने कहा कि वे किसानों के हितैषी थे । के. अनुष्का और गायत्री रथो ने राहुल के रचना संसार पर परिचयात्मक आलेख पाठ किया । कार्यक्रम का संचालन करते हुए संजय जायसवाल ने कहा कि राहुल सांकृत्यायन आज हमारे लिए ज्यादा प्रासंगिक हैं क्योंकि वे धार्मिक कट्टरता और अज्ञानता को मानव विरोधी मानते हैं । शोधार्थी दीपनारायण चौहान ने विषय प्रवर्तन एवं अमित कुमार राय ने धन्यवाद ज्ञापन दिया ।

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