नृत्य और संगीत से अलग नहीं हो सकती मैं

वह जब थिरकती हैं तो आपकी नजर बस ठहर जाती है। सोशल मीडिया पर अक्सर वह अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करती रहती हैं मगर रुकिये, वह एक कुशल नृत्यांगना ही नहीं, एक मेधावी छात्रा भी हैं। इसके साथ ही वह शिक्षिका और पत्रकार भी रह चुकी हैं। कलकत्ता विश्वविद्यालय से हिन्दी में स्नातकोत्तर कर रही मधुरिमा के मजबूत इरादे बताते हैं कि उनकी उड़ान आसमान से कहीं आगे हैं। अपराजिता ने मधुरिमा भट्टाचार्य से उनके नये – नये सफर की कुछ बातें जानीं, आप भी जानिए –

प्र. अपने बारे में बताइए?
उ. मूल रूप से मैं त्रिपुरा की रहने वाली हूँ । ढाई साल की थी जब से नृत्य सीख रही हूँ। जी बांग्ला के प्रख्यात डांस शो ‘डांस बांग्ला डांस’ के सिलसिले में मेरा कोलकाता आना हुआ। इसके बाद स्नातकोत्तर की पढ़ाई के लिए फिर कोलकाता आई। कलकत्ता विश्वविद्यालय से हिन्दी साहित्य की पढ़ाई की और अब परीक्षा दी है।
प्र. आप बांग्लाभाषी हैं और हिन्दी से पढ़ाई कर रही हैं। लोगों को हैरत नहीं हुई?
. बांग्लाभाषी हूँ तो लोगों को आश्चर्य हुआ हो रहा था कि मैंने हिन्दी को क्यों चुना मगर हिन्दी से पढ़ाई की क्योंकि उत्तर -पूर्वी क्षेत्रों में हिन्दी को जगह बनाते देखना चाहती हूँ जो अब तक बन नहीं सकी है। कोशिश करूँगी कि आगे चलकर हिन्दी के लिए कुछ करूँ।
प्र. डांस बांग्ला डांस में चयन कैसे हुआ?
उ. कत्थक, भरतनाट्यम और रवीन्द्र नृत्य में 18 साल की उम्र तक, तीनों नृत्य शैलियों में विशारद कर चुकी हूँ। 2014 में जब स्नातक कर रही थी और प्रथम वर्ष में थी। तभी अचानक विश्वविद्यालय जाते हुए रास्ते में डांस बांग्ला डांस के ऑडिशन के बोर्ड्स देखते हुए पहली बार किसी ऑडिशन में गयी और चयन भी हो गया।


प्र. कैसा रहा अनुभव?
उ. इस शो के जज प्रख्यात अभिनेता देव थे। उनसे शो के दौरान काफी तारीफें मिलीं। नुसरत भी उस शो में जज थीं। इसके अलावा मुम्बई, कोलकाता और दूसरी जगहों के भी विशेषज्ञ थे। सभी से खूब सराहना मिली। शो तो नहीं जीत सकी मगर काफी कुछ हासिल हुआ और आज इस जगह पर हूँ। इसके अलावा मैंने अभिनेत्री देवश्री रॉय तथा दादागिरी में सौरव गाँगुली के साथ भी स्क्रीन शेयर किया।
प्र. नृत्य के अलावा क्या पसन्द है? आगे क्या करना है?
उ. अभिनय भी करती हूँ। 2010 में अभिनय के लिए भारत सरकार का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। बहुत से लोगों का मानना है कि मैं अभिनय में हाथ क्यों नहीं आजमाती मगर अब मुझे पीएचडी और सिविल सर्विस की तैयारी करनी है।
प्र. सफलता का श्रेय किसे देना चाहेंगी?
उ. परिवार से पूरा समर्थन मिला वरना उत्तर – पूर्वी राज्य से आकर मुकाम बनाना आसान नहीं होता। इसका पूरा श्रेय परिवार को ही जाता है।
प्र. क्या आगे भी नृत्य और संगीत आपके साथ रहने वाले हैं?
उ. उम्मीद है कि ऊँचा मुकाम जरूर हासिल कर सकूँगी। नृत्य के साथ संगीत , ये दोनों मेरे जीवन का अभिन्न अंग हैं जिसे चाहकर भी मैं कभी अलग नहीं हो सकती।

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