महारानी कैकयी का देश केकय

केकय (जिसे कैकेय, कैकस या कैकेयस नाम से भी जाना जाता है) एक प्राचीन राज्य था, जो अविभाजित पंजाब से उत्तर पश्चिम दिशा में गांधा और व्यास नदी के बसा था। यहां के अधिकांश निवासी केकय जनपद के क्षत्रीय थे।  अतः कैकेयस कहलाते थे। कैकेय लोग प्रायः मद्र देश, उशीनर देश या शिवि प्रदेश के लोगों के संबंध में रहते थे और सभी संयुक्त रूप से वाहिका देश में आते थे। ये वर्णन पाणिनि के अनुसार है।  केकय देश का उल्लेख रामायण में भी आता है। राजा दशरथ की सबसे रानी कैकेयी और उसकी दासी मंथरा केकय देश की ही थी।
भौगोलिक स्थिति
बहुत से पुराणों में कैकेय वासियों को गंधर्व, यवन, शक, परद, बाह्लीक, कंबोज, दरदास, बर्बर, चीनी, तुषार, पहलव आदि की गिनती में जोड़ा गया है। इन्हें इदीच्य के लोग कहा गया है। उदीच्य यानि उत्तरपथ की उत्तरी मंडल। केकैय ने वर्तमान झेलम, शाहपुर और गुजरात (पाकिस्तान) के क्षेत्रों में निवास किया था।
पुराण उल्लेख
राजा दशरथ की रानी कैकेयी, केकयराज की पुत्री थी और राम के राज्याभिषेक के पहले भरत और शत्रुघ्न राजगृह या गिरिव्रज में ही थे-
‘उभयौभरतशत्रुघ्नौ केकयेषु परंतपौ, पुरे राजगृहे रम्येमातामहनिवेशने  तथा ‘गिरिव्रजपुरवरं शोघ्रमासेदुरंजसा’
अयोध्या के दूतों की केकय देश की यात्रा के वर्णन में उनके द्वारा विपाशा नदी को पार करके पश्चिम की ओर जाने का उल्लेख है-
‘विष्णो: पदं प्रेक्षमाणा विपाशां चापि शाल्मलीम्…
अन्य महत्त्वपूर्ण तथ्य
कनिंघम ने गिरिव्रज का अभिज्ञान झेलम नदी (पाकिस्तान) के तट पर बसे ‘गिरिजाक’ नामक स्थान (वर्तमान जलालाबाद, प्राचीन ‘नगरहार’) से किया है। अलक्षेंद्र के भारत पर आक्रमण के समय ‘पुरु’ या ‘पौरस’ केकय देश का ही राजा था। उस समय उसकी पूर्वी सीमा रामायण काल के केकय जनपद की अपेक्षा संकुचित थी और इसका विस्तार झेलम और गुजरात के ज़िलों तक ही था। जैन लेखकों के अनुसार केकय देश का आधा भाग आर्य था। परवर्ती काल में केकय के लोग शायद बिहार में जाकर बसे होंगे और वहाँ के प्रसिद्ध बौद्ध कालीन नगर गिरिव्रज या राजगृह का नामकरण उन्होंने अपने देश की राजधानी के नाम पर ही किया होगा।
केकय राजवंश की एक शाखा मैसूर में जाकर बस गई थी। पुराणों में केकय लोगों को अनु का वंशज बताया है। ऋग्वेद में अनु के वंश का निवास परुष्णी नदी (रावी) के निकट या मध्य पंजाब में बताया गया है। जैन ग्रंथों में केकय के ‘सेयविया’ नामक नगर का उल्लेख है। रामायण से ज्ञात होता है कि कैकयी के पिता का नाम ‘अश्वपति’ और भाई का नाम ‘युधाजित्’ था।
सिकंदर और पोरस युद्ध (326 ईसा पूर्व) : भारत पर यूं तो छोटे-बड़े आक्रमण होते रहे लेकिन पहला बड़ा आक्रमण सिकंदर ने किया था। सिकंदर और पोरस के बीच हुए युद्ध में पोरस की जीत हुई थी। सिकंदर ने भारत के पश्‍चिमी छोर पर बसे पोरस के राज्य पर आक्रमण किया था। पोरस के राज्य के आसपास दो छोटे-छोटे राज्य थे- तक्षशिला और अम्भिसार। तक्षशिला, जहां का राजा अम्भी था और अम्भिसार का राज्य कश्मीर के चारों ओर फैला हुआ था। अम्भी का पुरु से पुराना बैर था इसलिए उसने सिकंदर से हाथ मिला लिया। अम्भिसार ने तटस्थ रहकर सिकंदर की राह आसान कर दी। दूसरी ओर घनानंद का राज्य था वह भी तटस्थ था। ऐसे में पोरस को अकेले ही लड़ना पड़ा। इस युद्ध के बाद भारत का पश्‍चिमी छोर कमजोर होने लगा। यवन आक्रांताओं के आक्रमण बढ़ने लगे। संपूर्ण अफगानिस्तान उक्त काल में भारत का पश्चिमी छोर था जहां उपगणस्थान, गांधार और केकय प्रदेश थे और ये सभी बौद्ध राष्ट्र बन चुके थे।
नोट – यह लेख भारतकोश, विकिपीडिया और वेबदुनिया से प्राप्त जानकारी पर आधारित है और किसी भी रूप में यह वेबपत्रिका इसका श्रेय नहीं लेती और न ही लेना चाहिए मगर जो आवश्यक है,उसका प्रसार करने का प्रयास हम जरूर करते हैं। आज स्थिति यह है कि आपको केकय देश का नक्शा भी शायद कठिनाई से मिले। केकय देश के नाम पर कैकयी की तस्वीर मिलती है। हमने अपने इतिहास को मिथक में तब्दील कर दिया है और यही आत्महीनता का कारण है। हम मानते हैं कि बदलते कालखंड में परिवर्तन को स्वीकार करना जरूरी है। हम सौहार्द के भी पक्षधर हैं मगर इस भावना के साथ भी अपनी धरोहरों को बचाये रखना भी हमारा यह दायित्व है। अबकी कभी इस क्षेत्र में निकलें तो केकय को जरूर तलाशिएगा।

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