रंगकृति ने किया खानाबदोश का मंचन

रंगकृति नाट्य संस्था ने पंजाबी लेखिका अजीत कौर की आत्मकथा खानाबदोश के कुछ हिस्सों को नाट्य रूप देकर एकल नाटक के रूप में प्रस्तुत किया । खानाबदोश नारी प्रधान स्वर लेकर लिखी गई अजीत कौर की आत्मकथा है ।यह आत्मकथा साहित्य अकादमी से पुरस्कृत कृति है । जिसे रंगकृति नाट्य संस्था के निर्देशक जीतेन्द्र सिंह द्वारा प्रस्तुत किया है । महिला आत्मकथा लेखन कई मायने में विवादित रहा ,समाज में बहस का मुद्दा रहा ।इस नाटक के माध्यम से यह मुद्दा फिर से रंगकृति के इस नाटक ने फिर से उठा कर दर्शकों की उत्कंठा बढ़ा दिया है । लगता है लेखिका अपने जीवन के गोपनीय पक्षों को सार्वजनिक कर महिला गरिमा को धक्का पहुंचाती है मर्यादा का उल्लंघन करती है लेकिन सच बयान कर दरअसल समाजिक समस्याओं पर प्रश्न चिन्ह लगाकर पुरुषों को कटघरे में खड़ा करती है । अजीत कौर की स्वोकारोति महिलाओं के बचाव में योग्य ठहरती है । वह एक जगह लिखती हैं कि औरत होना ही सबसे बड़ा गुनाह है,सबसे बड़ा गुनाह है, गुनाह ए अव्वल । इस नाटक में स्त्री पुरूष संबधों की जटिलताओं को बेहतर से समझाने की कोशिश की गयी है कि यह संबध सिर्फ शारीरिक इच्छाओं की पूर्ति नहीं बल्कि यह बताने कोशिश है कि स्त्रियों के जीवन में जीने के लिए सम्मानित जनित विकल्प पर कितना प्रभाव है । अजीत कौर की भूमिका कोलकाता की वरिष्ठ अभिनेत्री निवेदिता भट्टाचार्य ने इस एकल चरित्र को बहुत ही उम्दा तरीके से निभाया है ,दर्शकों में कुछ का कहना था अभी तक का उनके अभिनय में में यह सबसे बेहतरीन अभिनय था । साहित्यिक कृतियाँ जब प्रस्तुत होती है तो जरूर अपना प्रभाव दर्शकों पर छोड़ जाती है । निर्देशक जीतेन्द्र सिंह ने बड़ी बारीकियों के साथ अभिनय करवाया है ।सुमित राय की प्रकाश योजना नाट्य प्रस्तुति को सकून और चरित्र को गति देती है ।

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