विद्यासगर विश्वविद्यालय में कवि त्रिलोचन पर राष्ट्रीय संगोष्ठी

कोलकाता: विद्यासागर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा प्रायोजित, ‘त्रिलोचन का साहित्य: सृजन और चिंतन’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी के पहले दिन कार्यक्रम का उद्घाटन कला एवं वाणिज्य विभाग के संकायाध्यक्ष प्रो. दामोदर मिश्र ने किया। बीज भाषण रखते हुए प्रो. अरुण कुमार (रांची विश्वविद्यालय) ने कहा कि त्रिलोचन श्रव्य काव्य परंपरा के कवि हैं और सहजता एवं जनपक्षधरता उनकी कविता का केंद्रीय विषय है। बतौर विशिष्ट अतिथि विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. जयंत किशोर नंदी ने कहा कि इस संगोष्ठी के द्वारा त्रिलोचन के साहित्य पर कई नए बिंदु उभरकर आयेंगे। स्वागत भाषण रखते हुए प्रो. दामोदर मिश्र ने कहा कि बहुआयामी व्यक्तित्व वाले त्रिलोचन अपने ढंग से निराले थे और आधुनिकता के प्रचलित सांचे को अस्वीकार करके हुए वे आधुनिक थे। डॉ. सुभाष गुप्ता(करीम सिटी कॉलेज) ने त्रिलोचन के साहित्य पर विस्तार से चर्चा करते हुए उन्हें जनपदीय कवि कहा। डॉ राजीव रावत ने कहा कि त्रिलोचन भारतीय काव्य परंपरा के प्रतिनिधि कवि हैं। इस अवसर पर डॉ. मंजुला शर्मा, डॉ. ऋषि कुमार, प्रो. मंटू कुमार, श्रावणी दास, पूजा पाठक, गुलनाज बेगम, प्रियंका मिश्रा, पुष्पा मल्ल, रूपल साव, पंकज सिंह, कीर्ति कुमारी, प्रभाती मुंगराज, मौसमी गोप, राहुल शर्मा, मिथिलेश, सुषमा सिंह, रीता जायसवाल आदि ने आलेख पाठ किया। इस अवसर पर विभाग के विद्यार्थियों ने त्रिलोचन की कविता पर कोलाज प्रस्तुत किया। सोनाली कुमारी, सोमा दे, बीना पाल, श्रद्धा कुमारी, रेशमी वर्मा, सोनाली सेठ, एम मेघा, सारदा महतो, श्रावणी आदि ने काव्य नृत्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का सफल संचालन संजय जायसवाल, डॉ. स्वाती वर्मा और मधु सिंह और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. पकंज साहा ने दिया।

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