शिल्पकारों, दस्तकारों के लिए अल्पसंख्यक मंत्रालय शुरू करेगा ‘विरासत योजना’

नयी दिल्ली : अल्पसंख्यक समुदाय के गरीब दस्तकारों, शिल्पकारों और कारीगरों को पूंजी मुहैया कराने के लिए सरकार ‘‘विरासत योजना’’ शुरू करने की तैयारी में है। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की इस प्रस्तावित योजना के तहत दस्तकारों, शिल्पकारों और दूसरे पुश्तैनी कामों में लगे कारीगरों को 10 लाख रुपये तक का ऋण मुहैया कराए जाएगा। इस पर ब्याज की दर पांच फीसदी से भी कम रखे जाने की संभावना है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी बताया कि ‘इस प्रस्तावित योजना को लेकर जरूरी प्रक्रियाओं को पूरा किया जा रहा है और अगले डेढ़-दो महीनों में इसके शुरू हो जाने की उम्मीद है।’ दरअसल, इस योजना को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम (एनएमडीएफसी) के माध्यम से क्रियान्वित किया जाना है और इसका मसौदा भी एनएमडीएफसी द्वारा तैयार किया गया है। एनएमडीएफसी के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक मोहम्मद शहबाज अली ने बताया, ‘करीब तीन महीने पहले हमने इस योजना का प्रस्ताव मंत्रालय को भेजा था। मंत्रालय की ओर से हमसे कुछ और ब्यौरा मांगा गया था और हमने वो भी भेज दिया है। मंत्रालय इस योजना को लागू करने के लिए तैयार है। उम्मीद है कि यह योजना जल्द शुरू हो जाएगी।’ उन्होंने कहा कि एनएमडीएफसी की ओर से इस प्रस्तावित योजना का जो मसौदा तैयार किया गया है उसमें शिल्पकारों, दस्तकारों और कारीगरों को पांच फीसदी से भी कम के ब्याज पर 10 लाख रुपये तक की पूंजी मुहैया कराने का प्रावधान किया गया है ताकि ये लोग अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा सकें।
गौरतलब है कि शिल्पकारों, दस्तकारों और कारीगरों को बाजार और अवसर प्रदान करने के लिए अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय समय समय पर ‘हुनर हाट’ का आयोजन करता है। अली का कहना है, ‘शिल्पकारों, दस्तकारों और दूसरे पुश्तैनी कामों में लगे कारीगरों को ‘हुनर हाट’ से बड़ा बाजार और अवसर मिला है, लेकिन अभी बहुत सारे ऐसे लोग हैं जिनको अपने कारोबार के लिए पूंजी की जरूरत है। इन्हीं लोगों की मदद के लिए इस योजना का प्रस्ताव दिया गया है।’
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले कुछ वर्षों में यह देखा गया है कि पुश्तैनी पेशों से जुड़े लोगों की दिक्कतें बढ़ी हैं। उनके सामने सबसे बड़ी दिक्कत वित्तीय इंतजाम न होने की है। हमारे पास कई लोगों के सुझाव आए थे। इसके बाद हमने इस तरह की योजना का प्रस्ताव तैयार किया।’’

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