साहित्य और फिल्म को जोड़ने का अभिनव प्रयास

कोलकाता :  साहित्य अकादमी और भारतीय भाषा परिषद द्वारा आयोजित साहित्यिक फिल्मोत्सव और बुक बाजार का उद्घाटन आज परिषद सभागार में किया गया। बांग्ला के प्रसिद्ध कथाकार शीर्षेंदु मुखोपाध्याय ने इस अवसर पर परिषद सभाकक्ष में लगे बुक बाजार का उद्घाटन करते हुए कहा कि इस तरह की प्रदर्शनी खुली जगहों पर भी होनी चाहिए ताकि पाठकों को किताबें सहजता से उपलब्ध हो सकें। फिल्मोत्सव का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि साहित्य अकादेमी की विभिन्न भारतीय भाषाओं के साहित्यकारों पर बनाई तथ्यात्मक फिल्में साहित्य के प्रचार प्रसार में सहायक हो सकती हैं। यह फिल्मोत्सव  6 नवंबर तक प्रतिदिन 3 बजे से चलेगा। इसमें सुनील गांगोपाध्याय, केदारनाथ सिंह, महाश्‍वेता देवी, नवकांत बरुआ, गुलजार, सैयद मुस्तफा सिराज, बुद्धदेव बसु आदि प्रसिद्ध साहित्यकारों के जीवन और कृतियों पर बनी फिल्में दिखाई जाएंगी। साथ ही फिल्म निर्देशकों को सम्मानित भी किया जाएगा। इस अवसर पर साहित्य अकादेमी के बांग्ला परामर्श मंडल के संयोजक सुबोध सरकार ने कहा कि यह फिल्मोत्सव भारतीय भाषाओं के बीच सेतुबंधन का काम करेगा। इस अवसर भारतीय भाषा परिषद की अध्यक्ष डॉ.कुसुम खेमानी ने अस्वस्थता के कारण अपने भेजे गए संदेश में कहा कि साहित्य को लोकप्रिय बनाने तथा इसका संदेश जन-जन तक पहुंचाने के लिए ऐसे उत्सवों की बहुत जरूरत है।
साहित्य अकादेमी की तरफ से स्वागत भाषण करते हुए मिहिर कुमार साहू ने कहा कि साहित्य अकादेमी लोक संपर्क करके साहित्यिक व्यक्तित्वों से लोगों का परिचय बढ़ाने का प्रयत्न कर रही है। भारतीय भाषा परिषद के निदेशक डॉ.शंभुनाथ ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि फिल्में जनता तक पहुंचने का सबल माध्यम हैं और हमें साहित्य के लोकप्रियकरण के लिए यू-ट्यूब आदि माध्यमों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करना होगा, क्योंकि नई पीढ़ी साहित्य से कटती जा रही है।
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