आधुनिक हिन्दी भाषा और साहित्य के प्रणेता थे आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी

राजेन्द्र परदेसी हिन्दी के गद्य एवं पद्य दोनों को ही नया स्वरुप, नयी ऊर्जा और नये आस्वाद से सुसम्पन्न करने

Spread the love
Read more

शोध में पक्ष और विपक्ष कुछ नहीं होता : कमल किशोर गोयनका

मैं जयशंकर प्रसाद पर पीएचडी करना चाहता था मगर मेरे मन का विषय नहीं मिल पाया मेरे गुरू के कहने

Spread the love
Read more

विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस : क्योंकि किताबों से बेहतर कुछ नहीं

विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस हर साल 23 अप्रैल को मनाया जाता है। कहते हैं किताबों से अच्छा कोई दोस्त

Spread the love
Read more

समाज की जरूरत हैं प्रसाद की मुखर स्त्रियाँ और उनके प्रश्न

सुषमा कनुप्रिया जयशंकर प्रसाद हिन्दी साहित्य की निधि हैं और उनका साहित्य समाज की धरोहर। छायावाद का उत्कर्ष उनकी रचनाओं

Spread the love
Read more

स्त्री पुरुष के संबंधों को लोकतांत्रिक बनाने की जरूरत है

 प्रो. जगदीश्वर चतुर्वेदी सन् 2000 में स्त्री पर पहली पुस्तक लिखी थी। अगर स्त्री साहित्य और संबंधित पुस्तकों पर बात

Spread the love
Read more

क्रांतिकारी, लेखक और पत्रकार राधा मोहन गोकुल

– शिवशरण त्रिपाठी राधा मोहन गोकुल जी के बारे में नई पीढ़ी के लोग बहुत कम ही जानते हैं। आश्चर्य

Spread the love
Read more

इसमें तुम्हें जंगली पत्तों की खुशबू मिलेगी

विमलेश त्रिपाठी केदारनाथ सिंह मेरे प्रिय कवि हैं। इसका कारण यह नहीं है कि मेरा शोध-कार्य केदार जी पर ही

Spread the love
Read more

कहानी से संवाद की समीक्षा…डॉ. आशुतोष द्वारा

2018 में प्रकाशित कहानी से संवाद युवा आलोचक डाॅ.मृत्युंजय पांडेय की दूसरी पुस्तक है।इसमें 18 कहानीकारों की 25 कहानियों पर

Spread the love
Read more

प्रेमचंद के उपन्यास में नारी का आदर्श रूप : ‘गबन’ के संदर्भ में

डॉ. साधना झा हिन्दी साहित्य में प्रेमचंद का प्रादुर्भाव एक अविस्मरणीय घटना है । उन्होंने कथा साहित्य को तिलस्म एवं

Spread the love
Read more