बहिष्कार, ब्लेम गेम, धर्म और राजनीति में पीछे धकेल दी गयी औरत…दफन हो गये बच्चे

सुषमा कनुप्रिया महीने बीत गये…साल गुजर गये….सदियाँ गुजर गयीं…वक्त बदला मगर नहीं बदला तो औरतों को देखने का नजरिया। मैं

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स्त्री पुरुष के संबंधों को लोकतांत्रिक बनाने की जरूरत है

 प्रो. जगदीश्वर चतुर्वेदी सन् 2000 में स्त्री पर पहली पुस्तक लिखी थी। अगर स्त्री साहित्य और संबंधित पुस्तकों पर बात

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खूबसूरत देह…वक्ष…वजाइना….सर्जरी की चाह के बीच भटका सशक्तीकरण

अपराजिता फीचर्स डेस्क औरतों को मजबूत बनाने और उनको आगे ले जाने की बात करना सच कहा जाये तो एक

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प्रेम और प्रेम विवाह अपराध नहीं है, इस देश की संस्कृति है

अपराजिता फीचर डेस्क ऑनर किलिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार गत 5 फरवरी को एक बार फिर सख्त  कदम

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अभिजात्यता छोड़कर मुखर बनिये, तभी रहेंगी किताबें और सलामत रहेंगे आप

इस बार पुस्तक मेले की जगह बदल गयी है। देखा जाये तो इसका असर सकारात्मक ही पड़ा है मगर गौर

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किसान को बचाना, खुद को बचाना है, जिम्मेदारी सरकार की ही नहीं हम सबकी है

इस देश में कृषि और कृषक हमेशा से ही महत्वपूर्ण मगर उतने ही उपेक्षित और शोषित रहे हैं। हम उन

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उपेक्षा, हिंसा, राजनीति और हिंसक आन्दोलन में फँसा विकास को तरसा पहाड़

भारत बेहद खूबसूरत देश है और इस देश की खूबसूरती इसकी विविधता में है। विविधता में एकता का संदेश इस

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भारतीय भाषाओं और अपनी बोलियों को सम्मान देकर ही देश की अपनी राष्ट्रभाषा बनेगी हिन्दी

दक्षिण भारत& जिसकी संस्कृति उत्तर भारत से अलग है जहाँ इस देश की राजभाषा को राजनीति ने अवांछनीय बना दिया

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बड़ों की महत्वाकांक्षा और संवेदनहीनता के बीच पिस रहा बचपन

अपराजिता फीचर्स डेस्क जब हम बच्चे थे तो बड़ों की हर बात बुरी लगती थी और आज जब हम बड़े

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