वायरल और फेक न्यूज के जाल से बचें, खुद को इस्तेमाल न होने दें

यह आँकड़ों का दौर है और चर्चा का भी…चर्चा भी ऐसी कि सस्ती लोकप्रियता मिले या हिंसा और नफरत फैलायी

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नकली चेहरा छोड़कर खुद को स्वीकार करना ही वास्तविक सशक्तीकरण है

सिनेमा हमारी रग – रग में बसा है…। जिन्दगी की हर घटना और हर एक क्षण में हिन्दी फिल्मों…उसके नायकों

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लड़कर नहीं, साथ रचकर ही हम आगे बढ़ सकते हैं

अपराजिता समानता की सोच को सृजनात्मकता के साथ सामने रखने की कोशिश है। हमारी कोशिश है कि सकारात्मकता पर हमारा

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अंततः हमें ही एक दूसरे का हाथ थामना है

नया साल, नयी उम्मीदों का साल। पुरानी स्मृतियों से सीखने की सीख देता नया साल। हिंसा, कड़वाहटों और निराशा के

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अगर आजादी चाहिए तो जिम्मेदारी की बात पहले करनी होगी

आजादी, स्वाभिमान, सौहार्द और महिलाओं का सम्मान कुछ ऐसे शब्द हैं जो भारतीय लोकतंत्र का पीछा कर रहे हैं और

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गर्मी, चुनाव, परीक्षा के बाद एक ताजा उम्मीद के इंतजार में

यह मौसम गर्मियों का है और बंगाल ही नहीं जहाँ चुनाव हो रहे हैं, यह एक बार फिर उम्मीदें बाँधने

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