मुज्जफरपुर कांड : सिर्फ शोर मत बचाइए, जमीन पर जाकर काम भी कीजिए

आपने राक्षस देखे हैं….और राक्षसों के आगे घुटने टेकते राजा देखे हैं…..? आपने कलियों को असमय जमीन पर टूटते और

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शिक्षा को वास्तविकता से जोड़िए, जबरन सरलीकरण समाधान नहीं बल्कि घातक है

दाखिले का मौसम बस चल ही रहा है..मेधा का आधार परीक्षाओं में प्राप्त अधिकतम अंक ही रह गये हैं। नतीजा

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महज अंकों के सहारे जीवन का युद्ध नहीं जीता जा सकता

ये दौर प्रतियोगिता का दौर है और गलाकाट प्रतियोगिता का दौर है जो कि परीक्षाओं से होकर गुजरती हैं। अधिक

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वायरल और फेक न्यूज के जाल से बचें, खुद को इस्तेमाल न होने दें

यह आँकड़ों का दौर है और चर्चा का भी…चर्चा भी ऐसी कि सस्ती लोकप्रियता मिले या हिंसा और नफरत फैलायी

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नकली चेहरा छोड़कर खुद को स्वीकार करना ही वास्तविक सशक्तीकरण है

सिनेमा हमारी रग – रग में बसा है…। जिन्दगी की हर घटना और हर एक क्षण में हिन्दी फिल्मों…उसके नायकों

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लड़कर नहीं, साथ रचकर ही हम आगे बढ़ सकते हैं

अपराजिता समानता की सोच को सृजनात्मकता के साथ सामने रखने की कोशिश है। हमारी कोशिश है कि सकारात्मकता पर हमारा

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अंततः हमें ही एक दूसरे का हाथ थामना है

नया साल, नयी उम्मीदों का साल। पुरानी स्मृतियों से सीखने की सीख देता नया साल। हिंसा, कड़वाहटों और निराशा के

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अगर आजादी चाहिए तो जिम्मेदारी की बात पहले करनी होगी

आजादी, स्वाभिमान, सौहार्द और महिलाओं का सम्मान कुछ ऐसे शब्द हैं जो भारतीय लोकतंत्र का पीछा कर रहे हैं और

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