अंतरजातीय विवाह का साक्षी बना महिला आयोग

जयपुर : राजस्थान के महिला आयोग की मदद से जयपुर निवासी 19 वर्षीय युवती का विवाह उसके प्रेमी के साथ सम्पन्न हुआ। राजस्थान महिला आयोग इस विवाह का साक्षी बना जिसमें जयपुर की ज्योति (19) और मनीष (23) पूरे हिन्दू रीति-रिवाजों से जीवन साथी बने। यह दावा भी किया गया कि आयोग कार्यालय में विवाह का यह पहला मामला है। आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा ने पीटीआई—भाषा से बातचीत में आशंका जताई कि ज्योति ऑनर किलिंग की शिकार हो सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि अंतराजातीय युवक से प्रेम होने के कारण युवती को बिजली के झटके देकर यातनाएं दी गईं और उसके बाल काटकर घर में बंद रखा गया।
उन्होंने बताया कि आयोग ने स्वत: संज्ञान लेकर दोनों के परिजनों को बुलाया। दोनों परिवारों के साथ काउंसलिंग के बाद आयोग कार्यालय में पारिवारिक न्यायालय के न्यायाधीशों की मौजूदगी में पूरे हिन्दू रीति-रिवाजों के साथ दोनों का विवाह सम्पन्न कराया गया।
शर्मा ने कहा कि संभवतया इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि महिला आयोग के कार्यालय में इस तरह का विवाह सम्पन्न किया गया। आयोग ने विवाह प्रमाणपत्र और विवाह की न्यायायिक प्रक्रिया की कार्यवाही की। महिला आयोग और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं के समर्थन से उत्साहित नवविवाहिता ज्योति ने कहा कि उसने परिवारों वालों के खिलाफ​ अतंराजातीय युवक से विवाह करने के लिये बहुत यातनाएं सही हैं। उसने कहा कि अब वह बहुत खुश है कि दोनों परिवारों की रजामंदी से विवाह हुआ है।

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