बीमार बेटा नहीं आ सका तो बहू ने सास को दी मुखाग्नि

वजीरगंज (गोंडा) :  एक पुत्र वधू ने बेटी ही नहीं बेटे होने का भी फर्ज निभाने की मिसाल पेश की है। मुंबई से बीमार बेटे के न आ सकने की वजह से बहू ने न केवल सास के अंतिम संस्कार की तैयारी की बल्कि मुखाग्नि भी दी।
वजीरगंज के बभनी गांव की रहने वाली वृद्ध कलावती की रविवार बीमारी के दौरान मृत्यु हो गई थी। बेटे को खबर दी गई लेकिन बीमारी की वजह से वह नहीं आ सका। तब तीन दिन इंतजार करने के बाद गुरुवार को बहू गुड़िया ने सास का पूरा विधि विधान से अंतिम संस्कार किया।
गांव वालों ने बताया कि घर में बहू अकेली थी। मृतका का पुत्र राजितराम मुंबई में रहकर मेहनत मजदूरी करता है। पट्टीदारी के अन्य परिवारजन मुखाग्नि देने को तैयार नहीं थे। तीन दिनों तक शव बर्फ के सहारे सुरक्षित रखा गया। तब गुरूवार को गुड़िया ने सिर्फ बेटे के हाथों मुखाग्नि देने की परंपराओं को तोड़ते हुए एक नई पहल की अपनी सास को मुखाग्नि देने की रस्म निभाई। गांव के चंदन, बजरंगी और राम लायक का कहना है कि कि पुत्र वधू गुड़िया ने अपनी सास कलावती की बीमारी की हालत में भी में पुत्र-पुत्रियों से बढ़कर सेवा की थी।
प्रधान ने दी जानकारी :
बभनी ग्राम सभा प्रधान प्रतिनिधि अयोध्या चौहान ने बताया कि मृतका कलावती के एक ही पुत्र था जो मुम्बई में मजदूरी करता था। उसके बेटे की तबीयत काफी खराब है। उसका मुम्बई के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। हालत काफी नाजुक होने के कारण वह अपने घर मां के अंतिम संस्कार के लिए नहीं आ सका। जब परिवार के अन्य लोगों ने मुखाग्नि देने से इंकार किया तो बहू गुड़िया आगे आई। उसकी भावना को देखते हुए गांव वालों ने भी उसके फैसले को स्वीकार किया। मृत सास के पति की काफी पहले मौत हो चुकी है।

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