‘भारतीय भाषाओं के बीच एक सांस्कृतिक पुल है हिन्दी ’

मिदनापुर : विद्यासागर विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग की ओर से हिन्दी दिवस के अवसर पर `हिन्दी का राष्ट्रीय संदर्भ’ विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया । इस कार्यक्रम में सर्वप्रथम साहित्यकार विष्णु खरे के निधन पर एक मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई । इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विद्यासागर विश्वविद्यालय के कला और वाणिज्य विभाग के संकायाध्यक्ष प्रो. दामोदर मिश्र ने कहा कि हिन्दी अस्मिता की पहचान की भाषा है । ऐसे में समाज और राष्ट्रीय-मूल्यों को बचाने का संकल्प हिन्दी  से जुड़ा है । हमें मिलकर सभी भारतीय भाषाओं को बचाना होगा । डॉ. श्रीकांत द्विवेदी ने कहा कि हिन्दी का सहज होना उसे ज्यादा व्यापकत्व प्रदान करता है, हमें हिन्दी को ज्यादा से ज्यादा लोगों के चिंतन और सृजन का हिस्सा बनाना होगा । शोधार्थी दीपनारायण ने कहा कि हिन्दी के अधिकाधिक प्रयोग से ही पूरे देश में एक सेतु का निर्माण होगा । अमित राय ने कहा कि हिंदी पूरे देश से संवाद स्थापित करते हुए सबको साथ लेकर चलने का आह्वान करती है । मधुलिका कुमारी ने कहा कि हिन्दी जुबान की गुलामी का माध्यम बन रही है । इस अवसर पर अभिलक्ष्य आनंद, प्रियंका गुप्ता, विनय प्रसाद, रीता जायसवाल, रुखसार परवीन, पूनम गुप्ता ने अपने विचार रखे । इस अवसर पर आयोजित आशुभाषण में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान क्रमशः पूनम गुप्ता, श्रद्धा उपाध्याय एवं टीना परवीन को मिला । साहित्य प्रश्नोत्तरी में प्रथम स्थान मधु सिंह, रेशमी वर्मा, श्रद्धा के दल को, द्वितीय स्थान पूनम गुप्ता, अनिल शाह, सलोनी शर्मा के दल को तथा तृतीय स्थान अभिलक्ष्य आनंद, धनंजय प्रसाद, शारदा महतो के दल को मिला । एम. फिल की छात्रा रेशमी वर्मा ने कविता पर नृत्य प्रस्तुत किया । विभाग के विद्यार्थियों ने कविता पर सुंदर आवृत्ति प्रस्तुत की । मधु सिंह, पूनम गुप्ता, शारदा महतो, सलोनी शर्मा, विनय प्रसाद, श्रद्धा उपाध्याय, बिट्टू कौर ने अपनी स्वरचित कविताओं का पाठ किया ।
कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए विभागाध्यक्ष संजय जायसवाल ने कहा कि हिन्दी ने नवजागरण-काल में पूरे भारत को एकता के सूत्र में बांधा । हिन्दी पूरे देश में आभिभावक की भूमिका में है, जो सभी भारतीय भाषाओं को साथ लेकर चलने के संकल्प के साथ अपना विस्तार कर रही है । धन्यवाद ज्ञापन अमित राय ने दिया ।
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