मेनका गांधी की चिठ्ठी, पैन कार्ड फॉर्म में पिता का नाम हटाने का मिले विकल्प

नयी दिल्ली : केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्रालय चाहता है कि, तलाकशुदा महिलाओं के अलावा सिंगल मदर जो बच्चों को गोद लेती है, उन्हें पैन कार्ड पर पिता का नाम न लिखने की छूट मिले। फिलहाल, परमानेंट अकाउंट नंबर(PAN) के लिए पिता का नाम दर्ज कराना जरूरी है। आयकर विभाग हर करदाता को दस अंकों का अल्फान्यूमेरिक नंबर जारी करता है। इस मामले में महिला विकास मंत्री मेनका गांधी ने वित्त मंत्री पीयूष गोयल को एक चिठ्ठी लिखी है, जिसमें ये मांग की है कि सरकार पैन कार्ड के एप्लीकेशन फॉर्म की समीक्षा करे और सिंगल मदर के लिए ऐसी व्यवस्था करे कि उसे बच्चे का पैन कार्ड बनवाने में पिता का नाम देना जरूरी न हो।
मेनका गांधी ने इसे लेकर कहा है कि, जो महिलाएं अपने पति से अलग हो गईं और बच्चों के साथ रहती हैं। वो निजी कारणों से ये नहीं चाहती हैं कि उनके पूर्व पति का नाम बच्चों से जुड़े किसी दस्तावेज में आए। मेनका गांधी ने चिठ्ठी में लिखा कि, “सिंगल मंदर की भावनाओं का ध्यान रखते हुए, ये अहम हो जाता है कि हम उन्हें ये विकल्प दें कि जरूरी दस्तावेजों में उन्हें अपने पूर्व पतियों के नाम का जिक्र न करना पड़े।”वहीं महिला बाल विकास मंत्री ने कहा कि, “आज सिंगल मदर भी बच्चों को गोद ले रही है। ऐसे में हमारा मंत्रालय ऐसी महिलाओं को तरजीह देता है। ऐसे मामलों में किसी भी बच्चे के पैन कार्ड के फॉर्म में पिता का जिक्र नहीं होता है।”अगर वित्त मंत्रालय मेनका गांधी की इस गुजारिश को मान लेता है तो ये दूसरी बार होगा, जब सरकार सिंगल मदर को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों में परिवर्तन करेगा।

2016 में पासपोर्ट नियमों में हुआ था बदलाव
2016 में विदेश मंत्रालय ने सिंगल मदर के लिए पासपोर्ट के नियमों में बड़ा बदलाव किया था। इसके तहत तलाकशुदा और सिंगल मदर को अपने बच्चों के पासपोर्ट के आवेदन में पति के हस्ताक्षर के अलावा एनओसी की जरूरत को खत्म कर दिया गया था। अब ऑनलाइन पासपोर्ट आवेदन के फॉर्म में आवेदक को कानूनी अभिभावक के रूप में केवल मां या पिता में से किसी एक ही नाम देना होता है। इस नियम के बाद सिंगल परेंट्स को अपने बच्चों के पासपोर्ट के लिए आवेदन करने में काफी आसानी हो गई है।

सिंगल मदर का मुद्दा मेनका ने उठाया था
ये मेनका गांधी ही थी, जो विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के पास इस मसले को लेकर गई थीं। इस मामले में दिल्ली की सिंगल मदर प्रियंका गुप्ता ने अथॉरिटी के उस नियम के खिलाफ ऑनलाइन कैंपेन चलाया था कि वो अपनी बेटी के पासपोर्ट आवेदन के लिए अपने पूर्व पति का नाम बताएं।

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