हिन्दी-बांग्ला की काव्य धारा में झलके कबीर

कोलकाता : भारतीय भाषा परिषद के तत्वावधान में कबीर जयंती के मौके पर आयोजित काव्य लहरी – 2 की छठी गोष्ठी में महान कवि संत कबीर को याद किया गया । काव्य लहरी की विशिष्टता है कि इस आयोजन में प्रत्येक बार हिंदी भाषा के साथ अन्य किसी एक क्षेत्रीय भारतीय भाषा का समागम होता है । इस बार यह आयोजन हिंदी की व्यापकता के साथ अपने साथ समेट लाई थी बांग्ला भाषा की मिठास। कवयित्री कामायनी संजय ने निराला जी लिखित सरस्वती वंदना “वर दे वीणा वादनी” का सस्वर पाठ किया। तत्पश्चात सुशील कान्ति ने कबीर के गीतों का सुरीला पाठ किया। सुकान्त कर्माकर ने बांग्ला भाषा और साहित्य पर अपना विचार रखे ।
काव्य गोष्ठी की शुरूआत हिंदी के कवि विजय शर्मा विद्रोही ने अपने धधकती शब्दों से ओत-प्रोत देश भक्ति कविता से की। कल्याण गंगोपाध्याय एवं सुकान्त कर्माकर ने बांग्ला कविताओं का पाठ किया । वागर्थ के सह संपादक सुशील कान्ति ने अपनी बूढ़े शीर्षक रचना तथा गजल का पाठ किया। शिव प्रकाश दास ने अपनी सारगर्भित कविताओं का पाठ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता दामोदर वैली कॉर्पोरेशन के चेयर मैन प्रबीर मुखोपाध्याय ने की तथा मंच का कुशल संचालन कवि तथा काव्य लहरी के संयोजक व संचालक गिरिधर राय ने किया। अंत में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रबीर मुख्योपाध्याय ने अध्यक्षीय वक्तव्य के साथ ही अपनी बांग्ला कविताओं का पाठ किया। भारतीय भाषा परिषद की अध्यक्ष डॉ.कुसुम खेमानी ने आमंत्रित सभी कवियों को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया । वरिष्ठ कवयित्री श्रीमती प्रेम शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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